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एक बार किसी मौके पर लॉर्ड और लेडी माउन्टबेटन की मोहम्मद अली जिन्ना के साथ मुलाकात होना तय हुआ। जिन्ना ने सोच रखा था कि इस मौके पर बतौर यादगार एक फोटो हो जाए तो अच्छा रहेगा।

जिन्ना ने सोचा था कि लेडी माउन्टबेटन बीच में बैठेंगी और उऩके अगल-बगल बैठेंगे जिन्ना व लार्ड माउन्टबेटन और फोटो के तुरंत बाद वह 'ए रोज बिटवीन थार्न्स' यानी कांटों के बीच गुलाब कहकर मौके को खुशगवार बना देंगे।

मगर ऐन मौके पर यह हुआ कि जिन्ना के बैठते ही उनके अगल-बगल माउन्टबेटन दंपती बैठ गए। जिन्ना ने वह जुमला मन में बहुत बार दोहराया था सो उन्हें यह ध्यान न रहा कि अब वह जुमला फिट नहीं बैठता, बल्कि बहुत कटु भी हो जाएगा, सो उनके मुंह से वह निकल ही गया। कहना न होगा कि इस जुमले को सुनकर माउन्टबेटन दंपती उनको हैरानी से देखते रहे।

जिन्ना ने असावधानीवश उन दोनों को ‘कांटा’ और खुद को ‘गुलाब’ कह दिया था। जब उन्हें अपनी गलती का एहसास हुआ तो उन्होंने खेद प्रकट किया और माउन्टबेटन दंपती को जब असली बात का पता चला तो वे बड़ी देर तक इसका आनंद लेते रहे।

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