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बेंजामिन फ्रैंकलिन का जीवन उपलब्धियों की एक अजीब गाथा है। शिक्षा हो या साहित्य, प्रकाशन हो या व्यवसाय, शासन या खोज, हर क्षेत्र में उनकी उपलब्धियां महान हैं।

राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय राजनीति में भी वह अत्यंत लोकप्रिय थे। अपनी मुफलिसी के दौर में एक बार वह फटेहाल हालत में गली से गुजर रहे थे। एक सुंदर लड़की ने उन्हें देखा तो वह उसे देखकर मुस्कुराने लगी। फ्रैंकलिन ने कुछ कहा नहीं, किन्तु इतना अवश्य समझ लिया कि वह लड़की उनका उपहास कर रही है।

कई जगह भटकने के बाद वह एक छापाखाने में पहुंचे। वहां पर बिगड़ी हुई एक मशीन को ठीक करके उन्होंने प्रेस मालिक का दिल जीत लिया। उन्हें इस छापाखाने में नौकरी मिल गई।

प्रेस मालिक ने उनके लिए घर और खाने-पीने का प्रबंध भी कर दिया। संयोग से इसी घर में वह सुंदर लड़की डेबोरी रीड रहती थी जिसने कभी फ्रैंकलिन का मजाक उड़ाया था। अब दोनों ने जब एक दूसरे को देखा तो एक दूसरे के प्रति आसक्त हो गए। धीरे-धीरे दोनों का प्यार गहरा हो गया। दोनों ने विवाह करने का फैसला कर लिया। इस बीच, फ्रैंकलिन अच्छी नौकरी की तलाश में इंग्लैंड चले गए लेकिन वहां उनको नौकरी नहीं मिली। उन्होंने वापस लौटकर अपनी प्रेमिका डेबोरी रीड से विवाह करने का फैसला किया। लेकिन, जब वह लौटे तो उन्हें पता लगा कि डेबोरो का विवाह उसके परिजनों ने किसी और से कर दिया है।

वह कहीं और नहीं गए, बल्कि इस प्रतीक्षा में वहीं रुक गए कि शायद स्थितियां अनुकूल हो जाएं और डेबोरी उनकी हो जाए। दरअसल, डेबोरी के परिजनों ने उनपर दबाव डालकर जिस व्यक्ति से उसका विवाह कराया था। उसे वह पसंद नहीं करती थीं। संयोग से उनाका पति कहीं बाहर चला गया और फिर लौटा ही नहीं। फ्रैंकलिन के जीवन में फिर आशा जगी। डेबोरी फिर उनकी और मुड़ आईं। कुछ दिनों बाद दोनों का विवाह हो गया और दो बिछुड़े प्रेमी फिर मिल गए।

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