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रक्षाबन्धन का त्योहार हर वर्ष श्रावण शुक्ल पूर्णिमा (अगस्त माह में) के दिन मनाया जाता है। यह त्योहार सभी भाई-बहनों के लिए अनूठे व अटूट पावन-प्रेम का ऐतिहासिक व पौराणिक पर्व है। इस दिन बहनें अपने भाईयों को तिलक लगाती हैं और उनकी कलाई पर राखी बांधती हैं व उनकीं लंबी आयु की कामना करती हैं। इस पर भाई अपनी बहनों को उपहार भेंट करते और मन ही मन उन्हें हर विपत्ति में उनकी मदद करने का वचन देते हैं।

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पौराणिक प्रसंगों के अनुसार रक्षा बन्धन के दिन बहनों द्वारा बांधे जाने वाले धागे (राखी) में अलौकिक शक्ति होती है। हर पर्व हमारी सामाजिक धरोहर व सांस्कृतिक पहचान है। सभी पर्व हमें आपसी एकता एवं सामाजिक सौहार्द का सन्देश देते हैं। इनके संरक्षण एवं संवर्द्धन के लिए हमें हर पर्व मिलजुलकर प्रेम व सौहार्द भाव के साथ मनाना चाहिए।

रक्षाबन्धन पर्व से जुड़ी पौराणिक कहानियां

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कृष्ण-द्रौपदी

रक्षाबंधन या रक्षासूत्र बांधने का जिक्र महाभारत में आता है। भगवान श्रीकृष्ण ने अपने सुदर्शन चक्र से चेदि नरेश शिशुपाल का वध कर दिया था। सुदर्शन चक्र पुनः धारण करते समय उनकीं अंगुली कट गई और उससे खून बहने लगा। यह देखकर विचलित हुई द्रौपदी ने अपनी साड़ी का किनारा फाड़कर श्रीकृष्ण की कटी अंगुली पर बांध दी। श्रीकृष्ण ने इस पर द्रौपदी को वचन दिया कि वह भी मुश्किल वक्त में उसके काम आएंगे. कहा जाता है कि कुरुसभा में जब द्रौपदी का चीरहरण किया जा रहा था, उस समय श्रीकृष्ण ने द्रौपदी की पुकार सुनी और अपना वादा निभाया। श्रीकृष्ण ने चीरहरण के दौरान द्रौपदी की लाज बचाने में मदद की।

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यम-यमुना

पौराणिक कथाओं के अनुसार, राखी के त्योहार की शुरुआत मृत्यु के देवता यम और उनकी बहन यमुना के बीच रक्षाबंधन से भी मानी जाती है। यमुना ने अपने भाई यम को राखी बांधी थी। यम ने इस पर यमुना को अमरता का वरदान दिया। कहा जाता है कि मृत्यु के देवता यम ने इस त्योहार को लेकर वरदान दिया था कि जो भाई रक्षाबंधन के अवसर पर बहन से राखी बंधवाता है और उसकी आजीवन सुरक्षा का वचन देता है, तो उसे अमरत्व की प्राप्ति होगी।

रक्षाबन्धन पर्व से जुड़ी ऐतिहासिक कहानियां

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कर्णावती-हुमायूं

मेवाड़ के महाराजा राणा सांगा की मृत्यु के बाद बहादुर शाह ने मेवाड़ पर आक्रमण कर दिया था। इससे चिंतित रानी कर्णावती ने मुगल बादशाह हुमायूं को एक चिट्टी भेजी। इस चिट्ठी के साथ कर्णावती ने हुमायूं को भाई मानते हुए एक राखी भी भेजी और उनसे सहायता मांगी। हालांकि मुगल बादशाह हुमायूं बहन कर्णावती की रक्षा के लिए समय पर नहीं पहुंच पाया, लेकिन उसने कर्णावती के बेटे विक्रमजीत को मेवाड़ की रियासत लौटाने में मदद की।

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रुक्साना-पोरस

रक्षाबंधन को लेकर इतिहास में राजा पुरु (पोरस) और सिकंदर की पत्नी रुक्साना के बीच राखी भेजने की एक कहानी भी खूब प्रसिद्ध है। दरअसल, यूनान का बादशाह सिकंदर जब अपने विश्व विजय अभियान के तहत भारत पहुंचा तो उसकी पत्नी रुक्साना ने राजा पोरस को एक पवित्र धागे के साथ संदेश भेजा। इस संदेश में रुक्साना ने पोरस से निवेदन किया कि वह युद्ध में सिकंदर को जान की हानि न पहुंचाए। कहा जाता है कि राजा पोरस ने जंग के मैदान में इसका मान रखा और युद्ध के दौरान जब एक बार सिकंदर पर उसका धावा मजबूत हुआ तो उसने यूनानी बादशाह की जान बख्श दी। इतिहासकार रुक्साना और पोरस के बीच धागा भेजने की घटना से भी राखी के त्योहार ये जोड़ते हैं।


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