भारतीय संस्कृति में कुछ युग पहिले महिला वस्ञ परिधान ढंग का था! स्तनपान में उतनी बाधा नही होती थी.आज कपड़े ,काम , नौकरी की वजह से बदला हो चुका है ! सामाजिक जगह पर आब बच्चे को दूध पिलाना एक समस्या के रुप मे दिखता. कोलकत्ता के एक मॉल मे कुछ घटना घटी, फिर से यह प्रश्न रास्ते पर आने लगा है !
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कोलकाता में एक मॉल ने मां को स्तनपान के लिए जगह नहीं दी वहां के कर्मचारी से महिला ने बहुत विनंती की. दिल्ली हाई कोर्ट ने सार्वजनिक स्थल पर माताओं को स्तनपान सुविधा मुहैया कराने पर केंद्र,राज्य सरकार और नगर निगम से उनकी राय मांग था! कोर्ट ने कहा कि दुनियाभर में माताओं को यह सुविधा मुहैया कराई जा रही है! हमारें देश सभी सार्वजनिक ठिकाना पर जगहा निर्मान होना जरुरी है!

महाराष्ट्रा मे बस,रेल्वे स्टेशन पर अलग से जगहा का प्रबध पिछले कही सालो से यह सुविधा मुहैया कराई है,और देश अन्य विभिन्न राज्या में यह सुविधा देखने को मिलती है! जदातर सरकारी सार्वजनिक जगहा पर उपलब्ध होती है,पर मॉल या कोई मार्केट मे ऐसी अलग जगह का निर्मान नही काया जाता है,जब बच्चे को स्तनपान करणा हो तब कोलकत्ता जैसे घटनाऐं घटीत होती है!

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यह घटना, एक महिला ने मॉल प्रशासन से कई मिन्नतें कीं लेकिन किसी ने उसकी नहीं सुनी ! अंत में एक शोरूम मैनेजन ने महिला को ट्रायल रूम में जाने की इजाज़त दी.ये महिला अब मॉल के खिलाफ कानूनी लड़ाई के लिए कोर्ट भी जा सकती है,कहना है, हर बढे़ शॉपिंग सेंटर ,मार्केट स्तनपान कि जगहा सुनिश्चित होनी चाहिऐ, यह सभी महिलाओं का अधिकार है ! सरकार इस तरहा के जगहा बनवानें का अदेश निकाल सकती है.

जब किसी महिला को बच्चे को स्तनपान करना होता है,कई मुसीबत आती है. समय पर फिडिंन ना होने पर बच्चे के सेहत पर विपरीत परिणाम हो सकता है ! इस स्थिति एक नागरीक के नाते आपको महिला को जगह देनी चहिऐं जिम्मेदारी समझकर सहायता करना जरूरी है. उमिद करते सरकार ऐसे जगहा कानूनी स्तर बनाकर जगहा बनवाने का आदेश दे.

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