दोस्तों इंसान एक दूसरे के साथ बात कर सकते है। पर क्या अापने कभी किसी अन्य प्राणी को इंसान के साथ बात करते हुए देखा है। इंसान ने बात करने के लिए सिर्फ मुँह की भाषा ही नहीं सांकेतिक भाषा या इशारो की भाषा का भी अविष्कार किया है। और इसी सांकेतिक भाषा का इस्तेमाल कर के यह गोरिल्ला को इंसान की भाषा सिखाई गई थी। परंतु यह गोरिल्ला ४६ की उम्र में मर गया है। १९ जून २०१८ को इस गोरिल्ला ने आखरी सास ली। तो इतना क्या खास था इस गोरिल्ला में, आइये देकते है।

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कोको नमक यह गोरिल्ला १००० से ज्यादा सांकेतिक भाषा समाज सकता था। फ्रान्सिन पत्तिनसों इस गोरिल्ला की केयर टेकर थी। फ्रान्सिन ने इस कोको गोरीला के बचपन से ही इंसानी भाषा सिखानी शुरू कर दी थी। इसके लिए एक खास सांकेतिक भाषा बनाए गई थी जिसे गोरिल्ला साइन लैंग्वेज कहते है। सनफ्रांसिस्को के चिड़ियाघर में जन्मा यह कोको गोरीला ४६ की उम्र तक इसे सिखाए गए सभी सांकेतिक भाषा का इस्तेमाल करता था।

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फ्रान्सिन की शिक्षा इतनी अछि थी की यह कोको गोरिल्ला काफी पेचीदे इशारे भी करने लगा था। इसने सांकेतिक भाषा का इतना अच्छा इस्तेमाल करना सिका की इससे पहले कोई प्राणी नहीं कर पाया था।

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